मेलबर्न टेस्ट के तीसरे दिन भारतीय गेंदबाज़ों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए ऑस्ट्रेलियाई टीम को 151 रनों पर समेट दिया.
इस प्रदर्शन के अगुवा रहे तेज़ गेंदबाज़ जसप्रीत बुमराह जिन्होंने 6 विकेट लिए और अपने गेंदबाज़ी के वेरिएशन से बल्लेबाज़ों की नाक में दम कर दिया.
तीसरा दिन शुरू होने के साथ जब पहले चार ओवरों में ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज़ हैरिस और फिंच ने चार के औसत से रन जोड़ने शुरू किए तो लगा कि ऑस्ट्रेलियाई टीम वापसी कर सकती है. लेकिन अचानक सब कुछ बदल गया.
पहले ईशांत शर्मा ने फिंच को वापस भेज दिया और फिर बुमराह ने हैरिस को आउट कर दिया.
लंच ब्रेक से ठीक पहले बॉलिंग करते हुए बुमराह की गेंदबाज़ी में वो सब कुछ दिख रहा था जो एक सधे हुए तेज़ गेंदबाज़ में दिखता है. वो इन कटर, आउटस्विंग, स्लो बॉल और बाउंसर सभी वेरियएशन से बल्लेबाज़ को चकमा दे रहे थे.
आमतौर पर 140 किलोमीटर की स्पीड से गेंद डालने वाले बुमराह ने 33वें ओवर की आखिरी गेंद को स्लोअर डाला. उन्होंने फुल लेंथ गेंद फेंकी जो पिछली गेंद से 25 मील धीमी थी. बुमराह की इस गेंद को शॉन मार्श समझ नहीं सके और बॉल ठीक मिडिल विकेट के सामने उनके बाएं पैड पर जा लगी. अंपायर को उंगली उठाते वक्त नहीं लगा. यह ऑस्ट्रेलियाई पारी का चौथा विकेट था.
बुमराह की ये गेंद सोशल मीडिया पर ख़ासी चर्चा बटोर रही है.
लंच के बाद का खेल शुरू हुआ तो बुमराह एक बार फिर अपने रंग में थे. इस ओवर की पहली गेंद बुमराह ने 135.2 किलोमीटर की, दूसरी यॉर्कर और पांचवी 143 किलोमीटर के स्पीड से फेंकी.
उनकी बॉलिंग के दौरान ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान माइकल क्लार्क टीवी पर कमेंट्री के दौरान बोले कि जसप्रीत बुमराह कोहली के लिए वैसे ही बॉलर हैं जैसे उनकी कप्तानी के दौरान रायन हैरिस थे.
"जब भी मुझे विकेट चाहिए होता था तो मैं गेंद हैरिस के हाथों में दे देता था. बुमराह कोहली के लिए ठीक वैसे ही हैं."
अगले ही ओवर में बुमराह ने हेड को बोल्ड कर एक बार फिर यह साबित कर दिया. ये लंच के बाद बुमराह का दूसरा ओवर था. पहली तीन गेंद खेलकर मार्श ने अभी अभी अपना खाता खोला था और बुमराह की चौथी गेंद पर हेड सामने थे.
लंच से पहले जिस गेंद पर बुमराह ने शॉन मार्श को आउट किया था वो 115 किलोमीटर की स्पीड से फेंकी गई थी. लेकिन ट्रेविस हेड को आउट करने वाली गेंद बुमराह ने 142 की रफ़्तार से फेंकी थी. हेड पूरी तरह चकमा खा गए और उनकी गिल्लियां बिखर गईं.
हेड के आउट होने के साथ ही आधी ऑस्ट्रेलियाई टीम पवेलियन लौट चुकी थी. स्कोर था 37 ओवर्स में 92/5.
टी ब्रेक से पहले ऑस्ट्रेलियाई पारी में केवल दो और विकेट गिरे. एक छोर पर कप्तान टिम पेन जमे हुए थे. टी ब्रेक के बाद कमेंटेटर्स के बीच एक बार फिर बुमराह की चर्चा चली. दूसरा ओवर उन्होंने फेंका और पहली गेंद ही स्टार्क के थाई पैड पर जा लगी. दूसरी गेंद फुल स्विंग थी, स्टार्क एक रन लेने में कामयाब रहे. अब सामने पेन थे और बुमराह ने उन्हें गुड लेंथ बॉल डाली जो उनके बल्ले से लगते हुए सीधी ऋषभ पंत के ग्लव्स में जा पहुंची. पेन के आउट होने तक 65 ओवर्स में ऑस्ट्रेलिया का स्कोर हो गया 147/8.
पिच पर नाथन लॉयन आए, बुमराह ने बाउंसर से उनका स्वागत किया. अगली दो गेंदों पर कोई रन नहीं बने. अगला ओवर जडेजा ने फेंका इसमें भी कोई रन नहीं बने. फिर 67वें ओवर की पहली गेंद पर ऑस्ट्रेलिया को बाई में चार रन मिले लेकिन बुमराह ने अगली ही गेंद पर एलबीडब्ल्यू आउट कर दिया और इसी ओवर की अंतिम गेंद पर हेज़लवुड को बोल्ड कर ऑस्ट्रेलियाई पारी को समाप्त कर दिया.
ऑस्ट्रेलिया ने पहली पारी में 151 रन बनाए और पहली पारी के आधार पर भारत को 292 रनों की बढ़त मिली लेकिन इसके बावजूद विराट कोहली ने ऑस्ट्रेलिया को फॉलोऑन नहीं दिया.
Thursday, December 27, 2018
Wednesday, December 19, 2018
मोदी सरकार ने 2 साल बाद संसद में मानी नोटबंदी से मौत की बात
मोदी सरकार ने कहा कि नोटबंदी के दौरान नोट बदलने के लिये बैंकों की लाइन में लगे लोगों की मौत का ब्योरा सिर्फ भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने मुहैया कराया है और इसमें बैंक की लाइन में सिर्फ एक ग्राहक और बैंक के तीन कर्मचारियों की मौत हुई है.
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने राज्यसभा को एक सवाल के लिखित जवाब में बताया कि नोटबंदी के दौरान नोट बदलने के लिये लाइन में खड़े होने से, सदमे से और काम के दबाव आदि से व्यक्तियों और बैंक के कर्मचारियों की मौत और परिजनों को दिये गये मुआवजे के बारे में एसबीआई को छोड़कर सरकारी क्षेत्र के किसी बैंक ने कोई सूचना नहीं दी है.
जेटली ने बताया कि एसबीआई ने नोटबंदी के दौरान तीन कर्मचारियों और एक ग्राहक की मौत होने की जानकारी दी. बैंक ने मृतकों के परिजनों को मुआवजे के रूप में 44.06 लाख रुपये दिये. इसमें से तीन लाख रुपये मृतक ग्राहक के परिजनों को दिए गए.
सांसद ने सरकार से मांगा ब्योरा
सीपीएम सांसद ई करीम ने 500 रूपये और एक हजार रुपये के पुराने नोट वापस लेने, नष्ट करने और नये नोट जारी करने पर रिजर्व बैंक की ओर से खर्च की गयी धनराशि साथ ही नोटबंदी के दौरान बैंकों में नोट बदलने वालों की लाइन में लगे लोगों की मौत का ब्योरा मांगा था. इसके जवाब में जेटली ने बताया कि रिजर्व बैंक ने नोटबंदी के बाद नये नोटों की छपाई पर हुआ व्यय अपनी लेखा रिपोर्ट में अलग से नहीं दर्शाया है.
सरकार की ओर से बताया गया कि नोटबंदी से पहले 2015-16 में नोटों की छपाई पर 34.21 अरब रुपये खर्च हुये थे जबकि 2016-17 में यह राशि 79.65 अरब रुपये और 2017-18 में 49.42 अरब रुपये थी. उन्होंने नोटबंदी से उद्योग और रोजगार पर पड़े असर का कोई अध्ययन कराने के सवाल पर कहा कि सरकार ने इस संबंध में कोई विशिष्ट अध्ययन नहीं कराया है.
बता दें कि 8 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के नाम संबोधन देते हुए नोटबंदी का ऐलान किया था. इसके बाद से 1000 और 500 के नोटों की वैधता खत्म हो गई थी. फैसले के बाद बैंकों में नए कैश की काफी किल्लत रही और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नोटबंदी के दौरान कैश के लिए लाइनों में लगने की वजह से हुए हादसों में 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी.
वहीं पीयूष गोयल के केन्द्रीय कैबिनेट में आने और प्रभारों में बदलाव के बीच पार्टी में एक व्यक्ति एक पद की नीति के चलते पार्टी बिना कोषाध्यक्ष के रही. पार्टी में एक कोषाध्यक्ष का काम पार्टी के फंड को संभालने का है. इस काम में पार्टी के दफ्तरों का खर्च, चुनाव प्रचार का खर्च, अध्यक्ष एंव अन्य पदाधिकारियों के पार्टी के काम से यात्रा का खर्च जैसे महत्वपूर्ण काम शामिल हैं. जाहिर है, सवाल खड़ा होता है कि जब जुलाई 2016 से पार्टी के पास कोई कोषाध्यक्ष नहीं है तो यह काम बीते 30 महीनों के दौरान कौन कर रहा है. खासबात है कि चुनावों के खर्च का ब्यौरा चुनाव आयोग को देने का काम भी पार्टी के कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी है. लिहाजा, पीयूष गोयल के बाद खाली पड़े इस पद की जिम्मेदारी बिना कोषाध्यक्ष के कैसे निभाई जा रही है. क्या पार्टी अध्यक्ष ने इस काम के लिए राष्ट्रीय कार्यकारिणी के किसी सदस्य को इस काम में लगाया है? यदि ऐसा है तो क्यों इस सदस्य को कोषाध्यक्ष मनोनीत नहीं किया गया है?
पार्टी में उच्च स्तरीय सूत्रों की मानें तो शीर्ष नेतृत्व में पार्टी के नए कोषाध्यक्ष को लेकर मतभेद की स्थिति है. ऐसी स्थिति में जहां पार्टी अध्यक्ष जिसे इस जिम्मेदारी के लिए मनोनीत करना चाहते हैं वह सदस्य राष्ट्रीय कार्यकारिणी को मंजूर नहीं है. वहीं राष्ट्रीय कार्यकारिणी के प्रभावी सदस्यों द्वारा सुझाए गए सदस्य पर पार्टी अध्यक्ष तैयार नहीं है. इस मतभेद के चलते पार्टी बीते 30 महीनों से बिना कोषाध्यक्ष के काम कर रही है. और सवाल यही है कि आखिर कैसे यह पार्टी बिना कोषाध्यक्ष के काम कर रही है?
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने राज्यसभा को एक सवाल के लिखित जवाब में बताया कि नोटबंदी के दौरान नोट बदलने के लिये लाइन में खड़े होने से, सदमे से और काम के दबाव आदि से व्यक्तियों और बैंक के कर्मचारियों की मौत और परिजनों को दिये गये मुआवजे के बारे में एसबीआई को छोड़कर सरकारी क्षेत्र के किसी बैंक ने कोई सूचना नहीं दी है.
जेटली ने बताया कि एसबीआई ने नोटबंदी के दौरान तीन कर्मचारियों और एक ग्राहक की मौत होने की जानकारी दी. बैंक ने मृतकों के परिजनों को मुआवजे के रूप में 44.06 लाख रुपये दिये. इसमें से तीन लाख रुपये मृतक ग्राहक के परिजनों को दिए गए.
सांसद ने सरकार से मांगा ब्योरा
सीपीएम सांसद ई करीम ने 500 रूपये और एक हजार रुपये के पुराने नोट वापस लेने, नष्ट करने और नये नोट जारी करने पर रिजर्व बैंक की ओर से खर्च की गयी धनराशि साथ ही नोटबंदी के दौरान बैंकों में नोट बदलने वालों की लाइन में लगे लोगों की मौत का ब्योरा मांगा था. इसके जवाब में जेटली ने बताया कि रिजर्व बैंक ने नोटबंदी के बाद नये नोटों की छपाई पर हुआ व्यय अपनी लेखा रिपोर्ट में अलग से नहीं दर्शाया है.
सरकार की ओर से बताया गया कि नोटबंदी से पहले 2015-16 में नोटों की छपाई पर 34.21 अरब रुपये खर्च हुये थे जबकि 2016-17 में यह राशि 79.65 अरब रुपये और 2017-18 में 49.42 अरब रुपये थी. उन्होंने नोटबंदी से उद्योग और रोजगार पर पड़े असर का कोई अध्ययन कराने के सवाल पर कहा कि सरकार ने इस संबंध में कोई विशिष्ट अध्ययन नहीं कराया है.
बता दें कि 8 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के नाम संबोधन देते हुए नोटबंदी का ऐलान किया था. इसके बाद से 1000 और 500 के नोटों की वैधता खत्म हो गई थी. फैसले के बाद बैंकों में नए कैश की काफी किल्लत रही और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नोटबंदी के दौरान कैश के लिए लाइनों में लगने की वजह से हुए हादसों में 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी.
वहीं पीयूष गोयल के केन्द्रीय कैबिनेट में आने और प्रभारों में बदलाव के बीच पार्टी में एक व्यक्ति एक पद की नीति के चलते पार्टी बिना कोषाध्यक्ष के रही. पार्टी में एक कोषाध्यक्ष का काम पार्टी के फंड को संभालने का है. इस काम में पार्टी के दफ्तरों का खर्च, चुनाव प्रचार का खर्च, अध्यक्ष एंव अन्य पदाधिकारियों के पार्टी के काम से यात्रा का खर्च जैसे महत्वपूर्ण काम शामिल हैं. जाहिर है, सवाल खड़ा होता है कि जब जुलाई 2016 से पार्टी के पास कोई कोषाध्यक्ष नहीं है तो यह काम बीते 30 महीनों के दौरान कौन कर रहा है. खासबात है कि चुनावों के खर्च का ब्यौरा चुनाव आयोग को देने का काम भी पार्टी के कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी है. लिहाजा, पीयूष गोयल के बाद खाली पड़े इस पद की जिम्मेदारी बिना कोषाध्यक्ष के कैसे निभाई जा रही है. क्या पार्टी अध्यक्ष ने इस काम के लिए राष्ट्रीय कार्यकारिणी के किसी सदस्य को इस काम में लगाया है? यदि ऐसा है तो क्यों इस सदस्य को कोषाध्यक्ष मनोनीत नहीं किया गया है?
पार्टी में उच्च स्तरीय सूत्रों की मानें तो शीर्ष नेतृत्व में पार्टी के नए कोषाध्यक्ष को लेकर मतभेद की स्थिति है. ऐसी स्थिति में जहां पार्टी अध्यक्ष जिसे इस जिम्मेदारी के लिए मनोनीत करना चाहते हैं वह सदस्य राष्ट्रीय कार्यकारिणी को मंजूर नहीं है. वहीं राष्ट्रीय कार्यकारिणी के प्रभावी सदस्यों द्वारा सुझाए गए सदस्य पर पार्टी अध्यक्ष तैयार नहीं है. इस मतभेद के चलते पार्टी बीते 30 महीनों से बिना कोषाध्यक्ष के काम कर रही है. और सवाल यही है कि आखिर कैसे यह पार्टी बिना कोषाध्यक्ष के काम कर रही है?
Wednesday, November 7, 2018
कोर्ट के फैसले का संत समाज एक समय तक ही करेगा इंतजार
राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानंद ने अयोध्या मामले पर विवादित बयान दिया है. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार संत समाज एक तय समय तक ही करेगा. कोर्ट हो सकता है कि इस मामले को लंबा खींच दे. इसलिए अगर हमें और ज्यादा उलझाने की कोशिश की तो हम उसका इंतजार नहीं कर सकते.
तंज कसते हुए चिन्मयानंद ने कहा कि तारीख पर तारीख का इंतजार कैसे करें. उन्होंने कहा कि देश से ऊपर कोई कोर्ट नहीं है. वहीं फैजाबाद का नाम अयोध्या रखने का समर्थन किया.
स्वामी चिन्मयान्नद ने कहा, 'हम एक समय तक ही सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार कर सकते हैं, क्योंकि सौ साल से ज्यादा समय से केस कोर्ट मे ही चल रहा हैं. इस मामले में सिर्फ तारीख पर तारीख मिलती रहती है. इसलिए हो सकता है कि सुप्रीम कोर्ट में इस केस को लंबा खींचने के लिए हमे उलझा दें। लेकिन अब हम उलझना नहीं चाहते और फिर कोई भी कोर्ट देश से बड़ा नहीं होता है.'
उन्होंने कहा कि अगर कोर्ट इस केस को लंबा खींचेगा तो हमारे पास देश की जनता का साथ है और हमारी सरकार है. हम जल्द ही वहां पर राम मंदिर का निर्माण कराएंगे.
वहीं, उन्होंने कहा कि अयोध्या मामले से जुड़े अब तक सिर्फ दो लोग बचे हैं. जिसमे एक नृत्यगोपाल दास और हम. इसलिए हमें लग रहा है कि अब हमारे जीते जी राम मंदिर बना देख सकेंगे और जल्द अयोध्या में रामलला विराजमान होंगे.
सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मसले की सुनवाई टलने के बाद संतों की नाराजगी को देखते हुए यूपी के सीएम योगी आदित्य नाथ ने कहा था कि दिवाली पर अयोध्या में खुशखबरी लेकर जा रहे हैं. दिल्ली में आयोजित संतों के सम्मेलन के संबंध में उन्होंने कहा था कि दिल्ली में नहीं अयोध्या चलिए वहां खबर लेकर आ रहा हूं.
इसके बाद कयास लगाए जाने लगे कि योगी वहां पर क्या घोषणा करने वाले हैं. ऐसा बताया गया कि सरयू के किनारे 151 मीटर ऊंची तांबे की मूर्ति बनाई जाएगी. लेकिन योगी ने खुद यह बयान नहीं दिया. हां संत समाज की प्रतिक्रिया जरूर आ गई कि हम भव्य राम मंदिर का इंतजार कर रहे हैं मूर्ति का नहीं.
मंदिर का निर्माण करो के लग रहे थे नारे
लोगों की निगाहें मंगलवार को अयोध्या पर लगी थीं. ऐसा माना जा रहा था कि योगी जरूर कोई ऐसी घोषणा करेंगे जिससे राम मंदिर की राह आसान होगी या उससे जुड़ी होगी. उनके मंच पर पहुंचने से पहले ही नारे लगने लगे कि योगी जी 'मंदिर का निर्माण' करो.
तंज कसते हुए चिन्मयानंद ने कहा कि तारीख पर तारीख का इंतजार कैसे करें. उन्होंने कहा कि देश से ऊपर कोई कोर्ट नहीं है. वहीं फैजाबाद का नाम अयोध्या रखने का समर्थन किया.
स्वामी चिन्मयान्नद ने कहा, 'हम एक समय तक ही सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार कर सकते हैं, क्योंकि सौ साल से ज्यादा समय से केस कोर्ट मे ही चल रहा हैं. इस मामले में सिर्फ तारीख पर तारीख मिलती रहती है. इसलिए हो सकता है कि सुप्रीम कोर्ट में इस केस को लंबा खींचने के लिए हमे उलझा दें। लेकिन अब हम उलझना नहीं चाहते और फिर कोई भी कोर्ट देश से बड़ा नहीं होता है.'
उन्होंने कहा कि अगर कोर्ट इस केस को लंबा खींचेगा तो हमारे पास देश की जनता का साथ है और हमारी सरकार है. हम जल्द ही वहां पर राम मंदिर का निर्माण कराएंगे.
वहीं, उन्होंने कहा कि अयोध्या मामले से जुड़े अब तक सिर्फ दो लोग बचे हैं. जिसमे एक नृत्यगोपाल दास और हम. इसलिए हमें लग रहा है कि अब हमारे जीते जी राम मंदिर बना देख सकेंगे और जल्द अयोध्या में रामलला विराजमान होंगे.
सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मसले की सुनवाई टलने के बाद संतों की नाराजगी को देखते हुए यूपी के सीएम योगी आदित्य नाथ ने कहा था कि दिवाली पर अयोध्या में खुशखबरी लेकर जा रहे हैं. दिल्ली में आयोजित संतों के सम्मेलन के संबंध में उन्होंने कहा था कि दिल्ली में नहीं अयोध्या चलिए वहां खबर लेकर आ रहा हूं.
इसके बाद कयास लगाए जाने लगे कि योगी वहां पर क्या घोषणा करने वाले हैं. ऐसा बताया गया कि सरयू के किनारे 151 मीटर ऊंची तांबे की मूर्ति बनाई जाएगी. लेकिन योगी ने खुद यह बयान नहीं दिया. हां संत समाज की प्रतिक्रिया जरूर आ गई कि हम भव्य राम मंदिर का इंतजार कर रहे हैं मूर्ति का नहीं.
मंदिर का निर्माण करो के लग रहे थे नारे
लोगों की निगाहें मंगलवार को अयोध्या पर लगी थीं. ऐसा माना जा रहा था कि योगी जरूर कोई ऐसी घोषणा करेंगे जिससे राम मंदिर की राह आसान होगी या उससे जुड़ी होगी. उनके मंच पर पहुंचने से पहले ही नारे लगने लगे कि योगी जी 'मंदिर का निर्माण' करो.
अभी तो पटाखे जले भी नहीं, पहले ही जहरीली हो गई दिल्ली की हवा
अगर दिल्ली- एनसीआर के लोगों ने पटाखे जलाने से परहेज नहीं किया तो यहां की हवा और खराब हो सकती है. बुधवार को हालात खराब रहे, हालांकि बुधवार को हवा 'बेहद गंभीर' से 'गंभीर' श्रेणी में आई. विशेषज्ञों का कहना है कि अस्थमा के मरीजों का ध्यान रखने की जरूरत है. बच्चों का भी ख्याल रखना चाहिए.
बुधवार को लोधी रोड इलाके में प्रदूषण का स्तर बेहद खराब रहा. यहां 2.5 का स्तर 228 (खराब) और पीएम 10 का स्तर 232 (खराब) दर्ज किया गया. पूरी दिल्ली में पीएम 2.5 का औसत 351 दर्ज किया गया.
मंगलवार को दिल्ली का एयर क्वॉलिटी इंडेक्स (एक्यूआई) सुबह 9 बजे 403 रहा. यह सोमवार को इसी समय 415 था, जो शाम तक 435 हो गया था. भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक, सुबह के समय हल्की धुंध रही, जिससे प्रदूषण के तत्व भी थे. मंगलवार को नमी में थोड़ी सी गिरावट आई.
प्रदूषण पर नजर रखने वाली एजेंसियों ने कहा कि पड़ोसी राज्यों से पराली जलने से प्रदूषकों में हल्की गिरावट आई है. एयर क्वॉलिटी और मौसम पूवार्नुमान और शोध (सफर) के मुताबिक, यह स्थिति दिवाली तक रहेगी. उनका कहना है कि पटाखों के प्रदूषण में अगर कमी होती है, तो इसमें सुधार होने की संभावना है.
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री इमरान हुसैन ने मंगलवार को दिल्लीवासियों से हरित, पटाखा-मुक्त दिवाली मनाने का आग्रह किया, क्योंकि शहर की हवा की क्वॉलिटी 'बेहद खराब' है.
एक बयान में उन्होंने लोगों को दिवाली की शुभकामनाएं दीं और वायु प्रदूषण कम करने में सहयोग करने को कहा। उन्होंने कहा, "साल 2018 में दिल्ली के निवासियों और सरकारी एजेंसियों के संयुक्त प्रयासों के कारण बेहतर वायु गुणवत्ता वाले अधिक दिन देखने को मिले हैं। हालांकि, हमें दिवाली पर और उसके बाद भी अपने प्रयासों को सामूहिक रूप से जारी रखने की जरूरत है।"
उन्होंने कहा, "मैं वायु प्रदूषण में योगदान देने वाले सभी संबंधित लोगों से इसे कम करने अपील करता हूं। पटाखा-मुक्त दिवाली का जश्न एक ऐसा ही कदम है, और मुझे आशा है कि दिल्ली के निवासी अपना सकारात्मक योगदान जारी रखेंगे।"
बुधवार को लोधी रोड इलाके में प्रदूषण का स्तर बेहद खराब रहा. यहां 2.5 का स्तर 228 (खराब) और पीएम 10 का स्तर 232 (खराब) दर्ज किया गया. पूरी दिल्ली में पीएम 2.5 का औसत 351 दर्ज किया गया.
मंगलवार को दिल्ली का एयर क्वॉलिटी इंडेक्स (एक्यूआई) सुबह 9 बजे 403 रहा. यह सोमवार को इसी समय 415 था, जो शाम तक 435 हो गया था. भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक, सुबह के समय हल्की धुंध रही, जिससे प्रदूषण के तत्व भी थे. मंगलवार को नमी में थोड़ी सी गिरावट आई.
प्रदूषण पर नजर रखने वाली एजेंसियों ने कहा कि पड़ोसी राज्यों से पराली जलने से प्रदूषकों में हल्की गिरावट आई है. एयर क्वॉलिटी और मौसम पूवार्नुमान और शोध (सफर) के मुताबिक, यह स्थिति दिवाली तक रहेगी. उनका कहना है कि पटाखों के प्रदूषण में अगर कमी होती है, तो इसमें सुधार होने की संभावना है.
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री इमरान हुसैन ने मंगलवार को दिल्लीवासियों से हरित, पटाखा-मुक्त दिवाली मनाने का आग्रह किया, क्योंकि शहर की हवा की क्वॉलिटी 'बेहद खराब' है.
एक बयान में उन्होंने लोगों को दिवाली की शुभकामनाएं दीं और वायु प्रदूषण कम करने में सहयोग करने को कहा। उन्होंने कहा, "साल 2018 में दिल्ली के निवासियों और सरकारी एजेंसियों के संयुक्त प्रयासों के कारण बेहतर वायु गुणवत्ता वाले अधिक दिन देखने को मिले हैं। हालांकि, हमें दिवाली पर और उसके बाद भी अपने प्रयासों को सामूहिक रूप से जारी रखने की जरूरत है।"
उन्होंने कहा, "मैं वायु प्रदूषण में योगदान देने वाले सभी संबंधित लोगों से इसे कम करने अपील करता हूं। पटाखा-मुक्त दिवाली का जश्न एक ऐसा ही कदम है, और मुझे आशा है कि दिल्ली के निवासी अपना सकारात्मक योगदान जारी रखेंगे।"
Friday, November 2, 2018
直行还是右转 巴西新总统博尔索纳罗的对华政策挑战
过去十年,中国与巴西的关系有所紧张,而在中美贸易战的背景下,双方关系更是进入了一个新阶段。2009年以来,这个亚洲国家就是巴西最大的贸易伙伴,但大多数巴西民众和巴西领导人对中国却知之甚少。
专家认为,与中国的合作具有战略意义,而新一任巴西总统将不得不与北京打交道。
过去的周末,在第二轮投票中竞争入主高原宫(巴西总统府)的两名候选人——劳工党(PT)的费尔南多·哈达德(Fernando Haddad)和社会自由党(PSL)的雅尔·博尔索纳罗(Jair Bolsonaro)——各自提出的政府计划当中,甚至都未有直接提及中国的名字。作为右翼总统候选人的博尔索纳罗呼吁美国与台湾重新建立关系,而左翼候选人哈达德则将赌注押在巩固“金砖五国”(巴西、俄罗斯、印度、中国和南非)的合作关系上。
“要想与中国建立更良好的关系,巴西左右两派都面临着障碍,”巴西热图利奥·瓦加斯基金会(FGV)法学院的巴中研究中心协调人高文勇(Evandro Meneses de Carvalho)说,“这些障碍植根于巴西政界对于中国的社会共识上,而这种认识是想象出来的,不再反映当今中国的现实。”
高文勇认为,巴西国内的政治论辩概括了“20世纪政治图景当中占主流的意识形态叙事,即认为民主制度与资本主义是同一个硬币的两面”。
一方面,是“渗透在巴西右派思想当中反共产主义的意识形态偏见”;另一方面,则是“捍卫人权和民主议程下的政治运动所带来的不安感”。
博尔索纳罗当选总统 巴西“向右转”
北京清华大学公共管理学院研究员奥塔维奥·科斯塔·米兰达(Otávio Costa Miranda)强调,不仅是对中国,任何一个巴西执政者在面对世界任何一个国家的时候,都需要考虑巴西的战略目标。
“反华辞令就相当于朝巴西自己的脚上开枪,这种态度与巴西的利益背道而驰,”高文勇说。
争论点
中国是巴西最重要的产品市场,因此在巴西的贸易平衡中扮演着决定性的角色。2017年,中国在巴西的投资达到了最近七年的最高点。2018年1月至9月,巴西对华出口总额约为470亿美元,是对美出口额的两倍有余。
在香港工作的经济学家和顾问曼努埃尔·内托(Manuel Netto)表示,他曾被一些中国公司问及这一场总统选举。“巴西对中国有贸易顺差,你很难去和一个‘好客户’争吵,”他说。
科斯塔·米兰达认为,“在巴西具有战略地位的领域当中,国有和私营企业正在被中国投资者收购,其强度和速度是目前的讨论中一如所料地存在动摇和恐惧的主要原因。”
他认为,这些收购是符合巴西法规的,只不过是巴西的弱点“更加暴露在外”。而巴西对华贸易的范畴也并不广泛,主要集中在黄豆、肉类和矿物等低增值产品上。
如果没有清晰的合作策略,巴西就将会失去很多机会。“中国有世界上最大而且最有活力的市场,而我们的品牌、产品和文化在那里几乎无足轻重。”
“中国在全球的影响力越大,其抗拒力就将会越大,”浙江外国语学院教授、政治学家若泽·梅德罗斯(Jose Medeiros)说。
专家认为,与中国的合作具有战略意义,而新一任巴西总统将不得不与北京打交道。
过去的周末,在第二轮投票中竞争入主高原宫(巴西总统府)的两名候选人——劳工党(PT)的费尔南多·哈达德(Fernando Haddad)和社会自由党(PSL)的雅尔·博尔索纳罗(Jair Bolsonaro)——各自提出的政府计划当中,甚至都未有直接提及中国的名字。作为右翼总统候选人的博尔索纳罗呼吁美国与台湾重新建立关系,而左翼候选人哈达德则将赌注押在巩固“金砖五国”(巴西、俄罗斯、印度、中国和南非)的合作关系上。
“要想与中国建立更良好的关系,巴西左右两派都面临着障碍,”巴西热图利奥·瓦加斯基金会(FGV)法学院的巴中研究中心协调人高文勇(Evandro Meneses de Carvalho)说,“这些障碍植根于巴西政界对于中国的社会共识上,而这种认识是想象出来的,不再反映当今中国的现实。”
高文勇认为,巴西国内的政治论辩概括了“20世纪政治图景当中占主流的意识形态叙事,即认为民主制度与资本主义是同一个硬币的两面”。
一方面,是“渗透在巴西右派思想当中反共产主义的意识形态偏见”;另一方面,则是“捍卫人权和民主议程下的政治运动所带来的不安感”。
博尔索纳罗当选总统 巴西“向右转”
北京清华大学公共管理学院研究员奥塔维奥·科斯塔·米兰达(Otávio Costa Miranda)强调,不仅是对中国,任何一个巴西执政者在面对世界任何一个国家的时候,都需要考虑巴西的战略目标。
“反华辞令就相当于朝巴西自己的脚上开枪,这种态度与巴西的利益背道而驰,”高文勇说。
争论点
中国是巴西最重要的产品市场,因此在巴西的贸易平衡中扮演着决定性的角色。2017年,中国在巴西的投资达到了最近七年的最高点。2018年1月至9月,巴西对华出口总额约为470亿美元,是对美出口额的两倍有余。
在香港工作的经济学家和顾问曼努埃尔·内托(Manuel Netto)表示,他曾被一些中国公司问及这一场总统选举。“巴西对中国有贸易顺差,你很难去和一个‘好客户’争吵,”他说。
科斯塔·米兰达认为,“在巴西具有战略地位的领域当中,国有和私营企业正在被中国投资者收购,其强度和速度是目前的讨论中一如所料地存在动摇和恐惧的主要原因。”
他认为,这些收购是符合巴西法规的,只不过是巴西的弱点“更加暴露在外”。而巴西对华贸易的范畴也并不广泛,主要集中在黄豆、肉类和矿物等低增值产品上。
如果没有清晰的合作策略,巴西就将会失去很多机会。“中国有世界上最大而且最有活力的市场,而我们的品牌、产品和文化在那里几乎无足轻重。”
“中国在全球的影响力越大,其抗拒力就将会越大,”浙江外国语学院教授、政治学家若泽·梅德罗斯(Jose Medeiros)说。
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