Tuesday, February 26, 2019

पाकिस्तान की नेशनल कमांड अथॉरिटी क्या है?

भारत के नियंत्रण रेखा पार करके पाकिस्तान में जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों को निशाना बनाने की ख़बर के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है.

भारत के हमले के बाद पाकिस्तान से भी तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं और बैठकों और प्रेस ब्रीफिंग का दौर जारी है.

जहां भारत सरकार का कहना है कि भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने पाकिस्तान के भीतर जैश-ए-मोहम्मद के कैंप को तबाह किया है वहीं पाकिस्तान ने कहा है कि उसकी वायु सेना ने भारतीय विमानों को वापस खदेड़ दिया.

भारत के हमले की ख़बर आने के बाद पाकिस्तान में प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की अध्यक्षता में सुरक्षा सलाहकार परिषद की बैठक हुई. इस बैठक के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने कहा कि भारत ने पाकिस्तान की संप्रुभता का उल्लंघन किया है.

पाकिस्तान की ओर से कहा गया है कि वह भारत के इस ग़ैर-ज़रूरी आक्रमण का जवाब "अपनी पसंद की जगह और समय" पर देगा.

अब सबकी निगाहें इसी पर टिकी हैं कि पाकिस्तान आगे क्या करने वाला है.

इसे देखते हुए पाकिस्तान में बुधवार को नेशनल कमांड अथॉरिटी (एनसीए) की बैठक बुलाई गई है. माना जा रहा है कि ये बैठक बहुत अहम होगी और इसमें कोई बड़ा फ़ैसला हो सकता है.

अब सबकी निगाहें इसी पर टिकी हैं कि पाकिस्तान आगे क्या करने वाला है.

इसे देखते हुए पाकिस्तान में बुधवार को नेशनल कमांड अथॉरिटी (एनसीए) की बैठक बुलाई गई है. माना जा रहा है कि ये बैठक बहुत अहम होगी और इसमें कोई बड़ा फ़ैसला हो सकता है.

ऐसे में जानते हैं कि एनसीए क्या है और ये इतना महत्वपूर्ण क्यों है.

रणनीतिक तौर पर अहम परमाणु और मिसाइल संबंधी सभी नीतिगत मसलों पर निर्णय लेने वाला उच्चतम प्राधिकरण एनसीए ही है. साथ ही ये परमाणु व मिसाइल कार्यक्रम की देखरेख भी करता है.

युद्ध और तनाव की स्थिति में एनसीए सेना की तैनाती पर भी निर्णय लेती है. इसके तहत नीति निर्माण, सैन्य अभ्यास, तैनाती, अनुसंधान व विकास और पाकिस्तान के परमाणु हथियारों के संचालन और नियंत्रण संबंधी निर्णय भी होते हैं.

राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व दोनों ही इसका हिस्सा होते हैं. प्रधानमंत्री इसके प्रमुख होते हैं. थल, वायु और नौ सेना के अध्यक्ष और रक्षा मंत्री और विदेश मंत्री इसके सदस्य होते हैं.

बीबीसी संवाददाता शुमायला जाफ़री बताती हैं कि हवाई हमलों के बाद पाकिस्तान की ओर से दी गई प्रतिक्रिया में कहा गया है कि बुधवार को संसद का संयुक्त सत्र बुलाया जाएगा. साथ ही नेशनल कमांड अथॉरिटी की बैठक भी बुलाई गई है. एनसीए की बैठक में पाकिस्तान इस पर रणनीति बनाएगा कि उसे भारतीय हमले का किस तरह जवाब देना है.

आम तौर पर एनसीए की बैठक बहुत कम बुलाई जाती है. इसे बुलाने की ज़रूरत तब होती है जब सुरक्षा का मसला पैदा हुआ हो और सीमा में घुसपैठ हुई हो. ये बहुत गंभीर और उच्च स्तरीय मंच है.

साल 2000 में नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने परमाणु हथियारों से संबंधित फ़ैसले लेने के लिए एनसीए के गठन पर मुहर लगाई थी.

अप्रैल 1999 में तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ ने कहा था कि परमाणु और मिसाइल तकनीक का उपयोग करने के लिए दो महीने के अंदर एक सेंट्रल कमांड सिस्टम तैयार हो जाएगा. उन्होंने कहा था कि इस सिस्टम में नेशनल कमांड अथॉरिटी, डेवेलपमेंटल कंट्रोल बोर्ड गवर्निंग बॉडी, स्ट्रै​टेजिक फ़ोर्स कमांड और तीनों कमांड के लिए सेक्रेटेरिएट शामिल होंगे.

लेकिन, सैन्य आदेश और नियंत्रण का ये नया ढांचा उस वक़्त पूरा नहीं हो सका. सैन्य तख़्तापलट के बाद परवेज़ मुशरर्फ़ के राष्ट्रपति बनने पर इस पर अमल किया गया.

दो फ़रवरी 2000 को राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने नेशनल कमांड अथॉरिटी की स्थापना की. इसमें इंप्लॉयमेंट कंट्रोल कमिटी, डेवेलपमेंट कंट्रोल कमेटी और स्ट्रेटेजिक प्लांस डिविज़न शामिल होते हैं.

Thursday, February 21, 2019

सुप्रीम कोर्ट पूर्व फैसले की समीक्षा करेगा, पुनर्विचार याचिकाएं मंजूर

नई दिल्ली. राफेल डील पर दिए अपने फैसले पर सुप्रीम कोर्ट फिर से विचार करने को सहमत हो गया है। वकील प्रशांत भूषण की याचिका पर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि इसके लिए स्पेशल बेंच गठित होगी। राफेल मामले में कई अन्य पुनर्विचार याचिकाएं भी दायर की गई हैं। कोर्ट ने कहा कि जल्द ही सभी याचिकाओं की सुनवाई शुरू होगी।

कई नए तथ्य उजागर हुए: भूषण
गुरुवार को प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि राफेल मामले में बहुत से नए तथ्य सामने आए हैं। कोर्ट को इन पर ध्यान देना चाहिए। उनकी मांग है कि राफेल मामले की सुनवाई ओपन कोर्ट में की जाए।

भूषण ने यह भी कहा कि पिछले साल कोर्ट ने जब सुनवाई की थी तब सरकार की तरफ से पेश हुए अफसरों ने कोर्ट के सामने गलत तथ्य रखे थे। इन लोगों ने कोर्ट को गुमराह किया। कोर्ट इस पर गौर करे।

पिछले साल सरकार को मिली थी क्लीन चिट
सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2018 में अदालत की निगरानी में राफेल डील की जांच की मांग से जुड़ी सभी याचिकाएं खारिज कर दी थीं। तब कोर्ट ने कहा था- राफेल की खरीद प्रक्रिया में कोई खामी नहीं है। इसमें कारोबारी पक्षपातों जैसी कोई बात सामने नहीं आई।

कोर्ट ने कहा था कि ऐसे मामले में न्यायिक समीक्षा का नियम तय नहीं है। राफेल सौदे की प्रक्रिया में कोई कमी नहीं है। 36 विमान खरीदने के फैसले पर सवाल उठाना गलत है।

कोर्ट ने कहा था कि रिलायंस को ऑफसेट पार्टनर चुनने में कमर्शियल फेवर के कोई सबूत नहीं हैं। देश फाइटर एयरक्राफ्ट की तैयारियों में कमी को नहीं झेल सकता। कुछ लोगों की धारणा के आधार पर कोर्ट कोई आदेश नहीं दे सकता।

नई दिल्ली. गृह मंत्रालय ने केंद्रीय अर्ध सैन्य बलों (सीएपीएफ) के सभी जवानों को दिल्ली-श्रीनगर, श्रीनगर-दिल्ली, जम्मू-श्रीनगर और श्रीनगर-जम्मू के बीच आवाजाही के लिए सरकारी खर्च पर हवाई मार्ग से मंजूरी दी है। इसमें ड्यूटी और छुट्टी के दौरान की जाने वाली यात्राएं शामिल हैं। यह फैसला पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर आतंकी हमले के बाद लिया गया है। इससे सीएपीएफ के कांस्टेबल, हेड कांस्टेबल और एएसआई रैंक के 780,000 जवानों को फायदा होगा। वहीं, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने भी सीमा पर आतंकियों और नक्सलियों से लड़ रहे सैनिकों, सेना, और सुरक्षा बलों के बच्चों को बोर्ड परीक्षा में विशेष राहत देने का फैसला लिया है।

कश्मीर में तैनात अर्ध सैन्य बलों के आने-जाने के लिए 1 जनवरी 2018 को दिल्ली-श्रीनगर हवाई सेवा शुरू की गई थी,  लेकिन 31 जुलाई 2018 को इसे बंद कर दिया गया। हैरानी की बात यह है कि 1 जनवरी से हवाई सुविधा शुरू करने के आदेश की चिट्‌ठी 11 अप्रैल को जारी की गई थी। सूत्रों के मुताबिक, अर्ध सैन्य बलों के जवानों के लिए दोबारा हवाई सेवा शुरू करने का प्रस्ताव चार महीने से गृह मंत्रालय में लंबित था। इसे वित्तीय कारणों से मंजूरी नहीं मिली है। हालांकि, जम्मू से श्रीनगर जाते समय रोड ओपनिंग और सुरक्षा प्रबंधों का खर्च भी कम नहीं है।

सीआरपीएफ ने 4 फरवरी को हवाई मार्ग से श्रीनगर जाने की मंजूरी मांगी थी
4 फरवरी से बर्फबारी के कारण जम्मू में फंसे सीआरपीएफ के जवानों को भी हवाई मार्ग से श्रीनगर पहुंचने की मंजूरी मांगी गई थी। सीआरपीएफ के अधिकारियों ने इसका प्रस्ताव बनाकर मुख्यालय भेजा था। मुख्यालय ने यह प्रस्ताव गृह मंत्रालय को भेज दिया था। लेकिन, कोई जवाब न आने पर सीआरपीएफ का काफिला 14 फरवरी को सुबह साढ़े तीन बजे जम्मू से श्रीनगर के लिए रवाना हो गया। दोपहर बाद 3:15 बजे आतंकी हमला हो गया।

Thursday, February 7, 2019

苏格兰国家博物馆推出东亚厅:清朝扇子与文革文物同堂亮相

位于英国爱丁堡的苏格兰国家博物馆于2月8日开设东亚展厅,展出來自中国、日本和韩国三地的展品,跨越150多年历史。

展品从政治、军事、社会、文化等多方面展示三地共有的东亚文明,探索与欧洲历史的紧密联系,以期展开深层次的东西方对话。

将近过半的展品在最近几十年中首次展出,BBC中文带你走入展品背后的故事。

当曹芹第一次在藏品中见到这把中国清朝末年制造的扇子时,她的第一反应是,“是不是弄错了,这哪像中国古代的扇子。”

曹芹是苏格兰国家博物馆中国藏品的策展人,她见过的外销扇多以清淡素雅的风格为主,以山水、兰花、竹子等图案绘制成水墨画,象征中国古代文人墨客质朴的品格和刚毅的气质。而这把来到欧洲的扇子色彩丰富、鲜艳花哨,以彩绘工笔画描绘了孔雀呈祥、彩蝶伴花的场景,并镶嵌象牙片为扇骨,精雕细琢。

毕业於牛津大学考古学的曹芹通过研究发现,18、19世纪的中国确实有这种融合了中西方绘画风格的彩绘作品,专门出口欧洲市场。她说,这把扇子被誉为中国外销扇之王,以当时欧洲对于中国的想象设计,满足贵族以拥有东方物品为荣的需求。

曹芹对BBC中文说,“说明中国当时不是有什么就卖什么,而是根据自己的创造力,把产品的设计和市场的需求结合在一起。”

15世纪末葡萄牙人开辟新航线之后,中国海上对外贸易增长。尤其是在清朝时期,中国的瓷器广受欧洲欢迎。新开设的东亚展馆展出了一套印有苏格兰贵族族徽的茶具瓷器。

同外销扇之王一样,这套瓷器并非印有中国山水图样,而是彩绘成欧洲佛斯灵汉姆家族(Fotheringham of Powrie)的族徽和家训。该家族是当时苏格兰的贵族,拥有大片领地,地位显贵。其家族城堡遗址至今还留存在爱丁堡。

佛斯灵汉姆家族在18世纪将家族的徽章图案送往中国景德镇窑洞,订购高级瓷器。曹芹说,这套私人定制的瓷器不适合日常使用,但适用于特殊场合,比如节庆或大型聚会,令贵族伺机向朋友们炫耀家族的地位和财富。也因此显示欧洲上层社会对中国瓷器的钟爱和欣赏。

除了这套茶具,东亚展厅还展示了苏格兰与英格兰在18世纪期间经历皇位之争后,用于庆功而向中国定制的瓷碗。以及中国出口到中东、土耳其等地用于佛教寺院的装饰用品,根据当地特色而变化风格。

曾在河南大学文物馆从事过15年研究的历史学者白秦川对BBC中文表示,中国古代文人一向轻视生产工艺、制作方法等技术类生产,认为是雕虫小技。但18、19世纪的外销艺术品融合了中国传统审美和西洋趣味,“从某种方面来说是对历史的补充,反应中国制瓷工匠在当时的技术水平,以及中西方在工艺上的交流”。

青铜在整个东亚地区的地位很高,与黄金、白银在欧洲的地位类似。4000多年前,马家窑时期的陶罐已证实了陶器制造业达到了一定高度。新的东亚展厅以青铜为线索,展示了东亚地区的钱币体系。

中国拥有独立的钱币体系,钱币不只在中国使用,在东亚地区都在使用。比如在17、18世纪,朝鲜半岛和日本的钱币都是以中国的钱币为模型仿造。新的东亚展厅从最早的刀币、蚁鼻钱、布币、圆孔币,到秦始皇统一后的半两钱,“展现钱币的流线型发展”。

曹芹说,以前的展馆只是简单地向观众介绍钱币的名称和时代,这次新设的展厅从不同角度解说钱币的发展与使用,“将某一特定的展品和当时东亚地区的影响力连接起来”,显示青铜的重要地位。

白秦川多年从事钱币学研究,他说,青铜被称为“吉金”,是中国从殷周时期到春秋战国时期最重要的合金。秦汉时期以后出现铁器,但青铜仍然是货币的材料。东方钱币以青铜铸造为主、呈圆形方孔,与西方以金银打制、呈圆形无孔的特征不同。如在布展时表现这种不同,更容易令观众理解中西钱币的差异。