Thursday, December 27, 2018

जसप्रीत बुमराह के स्पेशल सिक्सर से कंगारू पस्त

मेलबर्न टेस्ट के तीसरे दिन भारतीय गेंदबाज़ों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए ऑस्ट्रेलियाई टीम को 151 रनों पर समेट दिया.

इस प्रदर्शन के अगुवा रहे तेज़ गेंदबाज़ जसप्रीत बुमराह जिन्होंने 6 विकेट लिए और अपने गेंदबाज़ी के वेरिएशन से बल्लेबाज़ों की नाक में दम कर दिया.

तीसरा दिन शुरू होने के साथ जब पहले चार ओवरों में ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज़ हैरिस और फिंच ने चार के औसत से रन जोड़ने शुरू किए तो लगा कि ऑस्ट्रेलियाई टीम वापसी कर सकती है. लेकिन अचानक सब कुछ बदल गया.

पहले ईशांत शर्मा ने फिंच को वापस भेज दिया और फिर बुमराह ने हैरिस को आउट कर दिया.

लंच ब्रेक से ठीक पहले बॉलिंग करते हुए बुमराह की गेंदबाज़ी में वो सब कुछ दिख रहा था जो एक सधे हुए तेज़ गेंदबाज़ में दिखता है. वो इन कटर, आउटस्विंग, स्लो बॉल और बाउंसर सभी वेरियएशन से बल्लेबाज़ को चकमा दे रहे थे.

आमतौर पर 140 किलोमीटर की स्पीड से गेंद डालने वाले बुमराह ने 33वें ओवर की आखिरी गेंद को स्लोअर डाला. उन्होंने फुल लेंथ गेंद फेंकी जो पिछली गेंद से 25 मील धीमी थी. बुमराह की इस गेंद को शॉन मार्श समझ नहीं सके और बॉल ठीक मिडिल विकेट के सामने उनके बाएं पैड पर जा लगी. अंपायर को उंगली उठाते वक्त नहीं लगा. यह ऑस्ट्रेलियाई पारी का चौथा विकेट था.

बुमराह की ये गेंद सोशल मीडिया पर ख़ासी चर्चा बटोर रही है.

लंच के बाद का खेल शुरू हुआ तो बुमराह एक बार फिर अपने रंग में थे. इस ओवर की पहली गेंद बुमराह ने 135.2 किलोमीटर की, दूसरी यॉर्कर और पांचवी 143 किलोमीटर के स्पीड से फेंकी.

उनकी बॉलिंग के दौरान ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान माइकल क्लार्क टीवी पर कमेंट्री के दौरान बोले कि जसप्रीत बुमराह कोहली के लिए वैसे ही बॉलर हैं जैसे उनकी कप्तानी के दौरान रायन हैरिस थे.

"जब भी मुझे विकेट चाहिए होता था तो मैं गेंद हैरिस के हाथों में दे देता था. बुमराह कोहली के लिए ठीक वैसे ही हैं."

अगले ही ओवर में बुमराह ने हेड को बोल्ड कर एक बार फिर यह साबित कर दिया. ये लंच के बाद बुमराह का दूसरा ओवर था. पहली तीन गेंद खेलकर मार्श ने अभी अभी अपना खाता खोला था और बुमराह की चौथी गेंद पर हेड सामने थे.

लंच से पहले जिस गेंद पर बुमराह ने शॉन मार्श को आउट किया था वो 115 किलोमीटर की स्पीड से फेंकी गई थी. लेकिन ट्रेविस हेड को आउट करने वाली गेंद बुमराह ने 142 की रफ़्तार से फेंकी थी. हेड पूरी तरह चकमा खा गए और उनकी गिल्लियां बिखर गईं.

हेड के आउट होने के साथ ही आधी ऑस्ट्रेलियाई टीम पवेलियन लौट चुकी थी. स्कोर था 37 ओवर्स में 92/5.

टी ब्रेक से पहले ऑस्ट्रेलियाई पारी में केवल दो और विकेट गिरे. एक छोर पर कप्तान टिम पेन जमे हुए थे. टी ब्रेक के बाद कमेंटेटर्स के बीच एक बार फिर बुमराह की चर्चा चली. दूसरा ओवर उन्होंने फेंका और पहली गेंद ही स्टार्क के थाई पैड पर जा लगी. दूसरी गेंद फुल स्विंग थी, स्टार्क एक रन लेने में कामयाब रहे. अब सामने पेन थे और बुमराह ने उन्हें गुड लेंथ बॉल डाली जो उनके बल्ले से लगते हुए सीधी ऋषभ पंत के ग्लव्स में जा पहुंची. पेन के आउट होने तक 65 ओवर्स में ऑस्ट्रेलिया का स्कोर हो गया 147/8.

पिच पर नाथन लॉयन आए, बुमराह ने बाउंसर से उनका स्वागत किया. अगली दो गेंदों पर कोई रन नहीं बने. अगला ओवर जडेजा ने फेंका इसमें भी कोई रन नहीं बने. फिर 67वें ओवर की पहली गेंद पर ऑस्ट्रेलिया को बाई में चार रन मिले लेकिन बुमराह ने अगली ही गेंद पर एलबीडब्ल्यू आउट कर दिया और इसी ओवर की अंतिम गेंद पर हेज़लवुड को बोल्ड कर ऑस्ट्रेलियाई पारी को समाप्त कर दिया.

ऑस्ट्रेलिया ने पहली पारी में 151 रन बनाए और पहली पारी के आधार पर भारत को 292 रनों की बढ़त मिली लेकिन इसके बावजूद विराट कोहली ने ऑस्ट्रेलिया को फॉलोऑन नहीं दिया.

Wednesday, December 19, 2018

मोदी सरकार ने 2 साल बाद संसद में मानी नोटबंदी से मौत की बात

मोदी सरकार ने कहा कि नोटबंदी के दौरान नोट बदलने के लिये बैंकों की लाइन में लगे लोगों की मौत का ब्योरा सिर्फ भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने मुहैया कराया है और इसमें बैंक की लाइन में सिर्फ एक ग्राहक और बैंक के तीन कर्मचारियों की मौत हुई है.

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने राज्यसभा को एक सवाल के लिखित जवाब में बताया कि नोटबंदी के दौरान नोट बदलने के लिये लाइन में खड़े होने से, सदमे से और काम के दबाव आदि से व्यक्तियों और बैंक के कर्मचारियों की मौत और परिजनों को दिये गये मुआवजे के बारे में एसबीआई को छोड़कर सरकारी क्षेत्र के किसी बैंक ने कोई सूचना नहीं दी है.

जेटली ने बताया कि एसबीआई ने नोटबंदी के दौरान तीन कर्मचारियों और एक ग्राहक की मौत होने की जानकारी दी. बैंक ने मृतकों के परिजनों को मुआवजे के रूप में 44.06 लाख रुपये दिये. इसमें से तीन लाख रुपये मृतक ग्राहक के परिजनों को दिए गए.

सांसद ने सरकार से मांगा ब्योरा

सीपीएम सांसद ई करीम ने 500 रूपये और एक हजार रुपये के पुराने नोट वापस लेने, नष्ट करने और नये नोट जारी करने पर रिजर्व बैंक की ओर से खर्च की गयी धनराशि साथ ही नोटबंदी के दौरान बैंकों में नोट बदलने वालों की लाइन में लगे लोगों की मौत का ब्योरा मांगा था. इसके जवाब में जेटली ने बताया कि रिजर्व बैंक ने नोटबंदी के बाद नये नोटों की छपाई पर हुआ व्यय अपनी लेखा रिपोर्ट में अलग से नहीं दर्शाया है.

सरकार की ओर से बताया गया कि नोटबंदी से पहले 2015-16 में नोटों की छपाई पर 34.21 अरब रुपये खर्च हुये थे जबकि 2016-17 में यह राशि 79.65 अरब रुपये और 2017-18 में 49.42 अरब रुपये थी. उन्होंने नोटबंदी से उद्योग और रोजगार पर पड़े असर का कोई अध्ययन कराने के सवाल पर कहा कि सरकार ने इस संबंध में कोई विशिष्ट अध्ययन नहीं कराया है.

बता दें कि 8 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के नाम संबोधन देते हुए नोटबंदी का ऐलान किया था. इसके बाद से 1000 और 500 के नोटों की वैधता खत्म हो गई थी. फैसले के बाद बैंकों में नए कैश की काफी किल्लत रही और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नोटबंदी के दौरान कैश के लिए लाइनों में लगने की वजह से हुए हादसों में 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी.

वहीं पीयूष गोयल के केन्द्रीय कैबिनेट में आने और प्रभारों में बदलाव के बीच पार्टी में एक व्यक्ति एक पद की नीति के चलते पार्टी बिना कोषाध्यक्ष के रही. पार्टी में एक कोषाध्यक्ष का काम पार्टी के फंड को संभालने का है. इस काम में पार्टी के दफ्तरों का खर्च, चुनाव प्रचार का खर्च, अध्यक्ष एंव अन्य पदाधिकारियों के पार्टी के काम से यात्रा का खर्च जैसे महत्वपूर्ण काम शामिल हैं. जाहिर है, सवाल खड़ा होता है कि जब जुलाई 2016 से पार्टी के पास कोई कोषाध्यक्ष नहीं है तो यह काम बीते 30 महीनों के दौरान कौन कर रहा है. खासबात है कि चुनावों के खर्च का ब्यौरा चुनाव आयोग को देने का काम भी पार्टी के कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी है. लिहाजा, पीयूष गोयल के बाद खाली पड़े इस पद की जिम्मेदारी बिना कोषाध्यक्ष के कैसे निभाई जा रही है. क्या पार्टी अध्यक्ष ने इस काम के लिए राष्ट्रीय कार्यकारिणी के किसी सदस्य को इस काम में लगाया है? यदि ऐसा है तो क्यों इस सदस्य को कोषाध्यक्ष मनोनीत नहीं किया गया है?

पार्टी में उच्च स्तरीय सूत्रों की मानें तो शीर्ष नेतृत्व में पार्टी के नए कोषाध्यक्ष को लेकर मतभेद की स्थिति है. ऐसी स्थिति में जहां पार्टी अध्यक्ष जिसे इस जिम्मेदारी के लिए मनोनीत करना चाहते हैं वह सदस्य राष्ट्रीय कार्यकारिणी को मंजूर नहीं है. वहीं राष्ट्रीय कार्यकारिणी के प्रभावी सदस्यों द्वारा सुझाए गए सदस्य पर पार्टी अध्यक्ष तैयार नहीं है. इस मतभेद के चलते पार्टी बीते 30 महीनों से बिना कोषाध्यक्ष के काम कर रही है. और सवाल यही है कि आखिर कैसे यह पार्टी बिना कोषाध्यक्ष के काम कर रही है?