नई दिल्ली. राफेल डील पर दिए अपने फैसले पर सुप्रीम कोर्ट फिर से विचार करने को सहमत हो गया है। वकील प्रशांत भूषण की याचिका पर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि इसके लिए स्पेशल बेंच गठित होगी। राफेल मामले में कई अन्य पुनर्विचार याचिकाएं भी दायर की गई हैं। कोर्ट ने कहा कि जल्द ही सभी याचिकाओं की सुनवाई शुरू होगी।
कई नए तथ्य उजागर हुए: भूषण
गुरुवार को प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि राफेल मामले में बहुत से नए तथ्य सामने आए हैं। कोर्ट को इन पर ध्यान देना चाहिए। उनकी मांग है कि राफेल मामले की सुनवाई ओपन कोर्ट में की जाए।
भूषण ने यह भी कहा कि पिछले साल कोर्ट ने जब सुनवाई की थी तब सरकार की तरफ से पेश हुए अफसरों ने कोर्ट के सामने गलत तथ्य रखे थे। इन लोगों ने कोर्ट को गुमराह किया। कोर्ट इस पर गौर करे।
पिछले साल सरकार को मिली थी क्लीन चिट
सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2018 में अदालत की निगरानी में राफेल डील की जांच की मांग से जुड़ी सभी याचिकाएं खारिज कर दी थीं। तब कोर्ट ने कहा था- राफेल की खरीद प्रक्रिया में कोई खामी नहीं है। इसमें कारोबारी पक्षपातों जैसी कोई बात सामने नहीं आई।
कोर्ट ने कहा था कि ऐसे मामले में न्यायिक समीक्षा का नियम तय नहीं है। राफेल सौदे की प्रक्रिया में कोई कमी नहीं है। 36 विमान खरीदने के फैसले पर सवाल उठाना गलत है।
कोर्ट ने कहा था कि रिलायंस को ऑफसेट पार्टनर चुनने में कमर्शियल फेवर के कोई सबूत नहीं हैं। देश फाइटर एयरक्राफ्ट की तैयारियों में कमी को नहीं झेल सकता। कुछ लोगों की धारणा के आधार पर कोर्ट कोई आदेश नहीं दे सकता।
नई दिल्ली. गृह मंत्रालय ने केंद्रीय अर्ध सैन्य बलों (सीएपीएफ) के सभी जवानों को दिल्ली-श्रीनगर, श्रीनगर-दिल्ली, जम्मू-श्रीनगर और श्रीनगर-जम्मू के बीच आवाजाही के लिए सरकारी खर्च पर हवाई मार्ग से मंजूरी दी है। इसमें ड्यूटी और छुट्टी के दौरान की जाने वाली यात्राएं शामिल हैं। यह फैसला पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर आतंकी हमले के बाद लिया गया है। इससे सीएपीएफ के कांस्टेबल, हेड कांस्टेबल और एएसआई रैंक के 780,000 जवानों को फायदा होगा। वहीं, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने भी सीमा पर आतंकियों और नक्सलियों से लड़ रहे सैनिकों, सेना, और सुरक्षा बलों के बच्चों को बोर्ड परीक्षा में विशेष राहत देने का फैसला लिया है।
कश्मीर में तैनात अर्ध सैन्य बलों के आने-जाने के लिए 1 जनवरी 2018 को दिल्ली-श्रीनगर हवाई सेवा शुरू की गई थी, लेकिन 31 जुलाई 2018 को इसे बंद कर दिया गया। हैरानी की बात यह है कि 1 जनवरी से हवाई सुविधा शुरू करने के आदेश की चिट्ठी 11 अप्रैल को जारी की गई थी। सूत्रों के मुताबिक, अर्ध सैन्य बलों के जवानों के लिए दोबारा हवाई सेवा शुरू करने का प्रस्ताव चार महीने से गृह मंत्रालय में लंबित था। इसे वित्तीय कारणों से मंजूरी नहीं मिली है। हालांकि, जम्मू से श्रीनगर जाते समय रोड ओपनिंग और सुरक्षा प्रबंधों का खर्च भी कम नहीं है।
सीआरपीएफ ने 4 फरवरी को हवाई मार्ग से श्रीनगर जाने की मंजूरी मांगी थी
4 फरवरी से बर्फबारी के कारण जम्मू में फंसे सीआरपीएफ के जवानों को भी हवाई मार्ग से श्रीनगर पहुंचने की मंजूरी मांगी गई थी। सीआरपीएफ के अधिकारियों ने इसका प्रस्ताव बनाकर मुख्यालय भेजा था। मुख्यालय ने यह प्रस्ताव गृह मंत्रालय को भेज दिया था। लेकिन, कोई जवाब न आने पर सीआरपीएफ का काफिला 14 फरवरी को सुबह साढ़े तीन बजे जम्मू से श्रीनगर के लिए रवाना हो गया। दोपहर बाद 3:15 बजे आतंकी हमला हो गया।
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